देखिए शहरी सरकार...डगर-डगर, टूटे फेरोकवर
भरतपुर. नगर निगम के 65 पार्षदों पर भले ही खुद के वार्डों में विकास की जिम्मेदारी है, लेकिन यह बोर्ड कितनी जिम्मेदारी निभा रहा है। इसका खुलासा शहर में जगह-जगह टूटे फेरोकवर से लगाया जा सकता है। इस छोटी समस्या के बड़े दर्द का सामना हर शहरवासी कर रहा है। शहर में सड़कों पर नालियों के ऊपर जगह-जगह टूटे फेरोकवर हादसों को आमंत्रण दे रहे है, लेकिन नगर निगम की ओर से इनकी सुध नहीं ली जा रही। शहर में ऐसे एक या दो स्थान नहीं बल्कि कईं है। यहां पर कईं जगह तो फेरोकवर ही नजर नहीं आते तो कुछ जगह पर टूटे पड़े है। लोहे के जाल वाले फेरोकवर के भी हालात खराब है। नालियों के ऊपर रखे टूटे फेरोकवर से आए दिन छिटपुट दुर्घटनाएं होना आम बात हो गई है। नगर निगम हर वर्ष नालियों पर फेरोकवर एवं लोहे के जाल आदि लगाने पर राशि खर्च करता है, लेकिन लगाने के बाद उनकी देखरेख करने की जहमत नहीं उठाता। जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक टूटे फेरोकवर, जर्जर लोहे के जाल आदि नहीं बदले जाते। इतना ही नहीं नालियों पर लगाए जाने वाले लोहे के जाल लगने के बाद ज्यादा समय तक नालियों पर दिखाई नहीं देते, अक्सर लोग लोहे के जालों को चुरा ले जाते हैं और फिर महीनों तक आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शहर की हर कॉलोनी में टूटे फेरोकवर
शहर के विभिन्न क्षेत्रों के नाले व नालियों पर लगे फेरोकवर टूटे हुए हैं। इनमें कच्ची बस्ती, सिमको कॉलोनी, ईदगाह कॉलोनी, गिर्राज कॉलोनी, कृष्णा नगर, काली बगीची, बीनारायण गेट और तिलक नगर सहित विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं। शहर की सरकार की बात करें तो इसकी कमान संभालने वाले आला अधिकारियों के घरों तक जाने वाली सड़कें हवाई पट्टी के समान हैं फिर चाहे वह महापौर के घर का रास्ता हो या फिर आयुक्त के घर तक जाने वाली सड़क। शहर की सरकार को बने करीब दो साल का समय होने को है लेकिन इसके बाद भी आमजन की सुविधाओं को नजरअंदाज कर जन प्रतिनिधि और आला अधिकारी अपने घर तक के रास्तों को सपाट करने में लगे है।
अधिकारी लग्जरी तो आमजन बैलगाड़ी में
शहर की सड़को के साथ ही अगर एक नजर यहां के नाले व नालियों पर लगे फेरोकवरों पर डाली जाए तो अधिकांश फेरोकवर क्षतिग्रस्त है लेकिन इसका अंदेशा जिम्मेदारों को शायद अपनी लग्जरी गाडिय़ों में बढ़ी शान से बैठकर निकलते समय नहीं होता। इन टूटे फेरोकवरों से निकलते समय आमजन को बैलगाड़ी की सी सवारी का अहसास होता है।
मेयर बोले: मेरे पास नहीं सारे शहर की सूचना
नगर निगम के मेयर अभिजीत कुमार से बात की तो उन्होंने कहना था कि मेरे पास पूरे शहर की जानकारी नहीं है कहां तक सही है। आप हमें निर्धारित स्थान बताए तब कोई संज्ञान लिया जाएगा।
आमजन बोले: जिम्मेदार खास आमजन की टूटी आस
- नदिया मोहल्ला में नालियों के जाल टूटे हुए हैं। रात के समय कई बार इनमें वाहनों के पहिए फंस जाते हैं और लोग दुर्घटना का शिकार होते हैं।
प्रशांत, नदिया मोहल्ला
- गोपालगढ़ जाने वाले रास्ते में नाला का जाल व कवर क्षतिग्रस्त है। कई बार यहां जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे लोगों को खासी परेशानी हो रही है।
गोलू, सूरज पोल
- रंजीत नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर फेरोकवर टूटे हुए हैं व पुलिया क्षतिग्रस्त हैं। इससे रात के समय यहां से गुजरने वाले राहगीरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सज्जन, रंजीत नगर
-बी-नारायण गेट से धीमर मोहल्ला, काली बगीची और बुद्ध की हाट जाने वाले रास्तों पर नालियां काफी लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं मगर नगर निगम का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
कार्तिक, बी-नारायण गेट
-शहर की पॉश कॉलोनी कृष्णा नगर में स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर नालियों को कवर किया है। आज भी कई नालियां खुली हुई हैं, लेकिन निगम की ओर से आमजन की सुविधा के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।
राजीव, कृष्णा नगर
- कसाई गली से कोडियान मोहल्ला होते हुए अनाह गेट को जाने वाले रास्ते में नाले का जाल और फेरोकवर क्षतिग्रस्त है। इससे रात को अंधेरे के समय कई बार दुर्घटना हो जाती है।
सोनू कंसल, कुम्हेर गेट
source https://www.patrika.com/bharatpur-news/see-urban-government-7132233/
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