नेत्रहीन गाय की सेवा से नए प्रयोग कर रोल मॉडल बना किसान गोपाल
भरतपुर. वह अनपढ़ अवश्य है, लेकिन अगर उसके गांव जाकर उसकी नई तकनीक व सेवा भाव को देखा जाए तो पढ़े लिखे भी कुछ नहीं है। कुम्हेर के गांव बावैन के किसान गोपाल की कहानी भी प्रेरणा से कम नहीं है। जहां आजकल दुधारू पशु के शरीर में थोड़ी भी परेशानी होने पर पशुपालक उसे बेचने से नहीं चूकता है, वहीं किसान गोपाल ने नेत्रहीन गाय की सेवा के साथ बड़ा मुकाम पाया है। वह पिछले 10 साल से गायों की सेवा कर रहे हैं। किसान गोपाल बताते हैं कि कुछ साल पहले अचानक ख्याल आया कि स्वस्थ गाय की सेवा सभी करते हैं, क्यों न किसी न किसी रूप से निशक्त गाय की सेवा करनी चाहिए। इसलिए एक नेत्रहीन गाय लेकर आया और उसकी सेवा शुरू की। गाय ने एक बछड़े को जन्म दिया और वह 30 लीटर दूध देने लगी। इसके बाद गोपाल ने भैंस बेचकर और गाय खरीदकर पालना शुरू कर दिया। आज 34 गाय पाल रहे हैं। गाय के मूत्र व गोबर से प्राकृतिक खेती गोपाल ने गाय के मूत्र एवं गोबर से प्राकृतिक खेती प्रारंभ कर खाद्यान्नों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार कर लिया। इसने गोपाल को प्रभावित किया उसने अपनी पूरी जमीन पर ही प्राकृतिक खेती आरंभ कर दी। गांव से दूर खेत पर घर...