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माटी का कर्ज चुका रहे अप्रवासी भारतीय यशपाल आर्य...

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भरतपुर. एसोसिएशन ऑफ इण्डियन इन अमेरिका की ओर से उपलब्ध कराए गए 60 ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटरों को लुपिन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कप्तानसिंह को सौंपा। ये कन्सन्ट्रेटर जिले की सीएचसी, पीएचसी व कोरोना कोविड सेन्टरों पर लगाए जाएंगे। ताकि वहां भर्ती होने वाले रोगियों को पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त हो सके। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान ऑक्सीजन की सर्वाधिक मांग रही है। जिसे पूरा करने के लिए सरकार विभिन्न स्थानों से मांग के अनुरूप ऑक्सीजन उपलब्ध करा रही है फिर भी रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ये कन्सन्ट्रेटर काफी हद तक मांग की पूर्ति कर पाएंगे। उन्होंने एआईए एवं लुपिन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुण्य के काम में अमेरिका में रह रहे भारतीयों ने मानवीयता का परिचय दिया है। कार्यक्रम में नगर निगम के आयुक्त डॉ. राजेश गोयल ने अमेरिका में रह रहे भरतपुर के वल्लभगढ़ निवासी यशपाल आर्य एवं उर्मिला आर्य ने भरतपुर के कोरोना रोगियों को ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए कन्सन्ट्रेटर उपलब्ध कराकर अनुकरणीय कार्य किया है। उन्होंने कहा क...

ख्याल डराते हैं, लेकिन डर के आगे जीत है

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भरतपुर. किसी भी बीमारी में बुरे ख्याल डराते हैं। मन आशंकित भी होता है, लेकिन बिना डरे एक-दूसरे की ताकत बनकर कोई भी जंग जीती जा सकती है। तन यदि बीमार हो जाए तो मन को बीमार नहीं होने दें। यही चीज बीमारी से उबरने के लिए रामबाण है। यदि हम मन से नहीं हारे तो इस डर से जरूर जीतेेंगे। यह कहना है गोपालगढ़ निवासी विशेष लोक अभियोजक पोस्को कोर्ट संख्या प्रथम तरुण जैन का। जैन के परिवार के आठ जनों ने कोरोना को हौसलों के बलबूते मात दी है। स्पेशल पीपी जैन बताते हैं कि अस्वस्थता महसूस होने पर जांच कराई तो 19 अप्रेल को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पिता भी मेरे संपर्क में आने से संक्रमित हो गए। इस पर हम दोनों पिता-पुत्र 24 अप्रेल को हॉस्पिटल में भर्ती हो गए। इस बीच हमारे सम्पर्क में आने के कारण अन्य परिजन भी इसकी चपेट में आ गए। यह पूरे परिवार के लिए मुश्किल घड़ी थी, लेकिन हम बिना डरे एक-दूसरे को हौसला बढ़ाते रहे। साथ ही नियमित रूप से दवाओं का सेवन करते हुए गाइडलाइन का पूरी तरह पालन किया। इस बीच सभी परिजन घर पर ही आइसोलेट हो गए। जैन बताते हैं कि इस बीच परिजन तो एक-दूसरे का हौसला बढ़ा ही रहे थे, लेकिन मित्र भी इ...

जमीनी हकीकत देखी तो कंपनी ने खड़े किए हाथ

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भरतपुर. चम्बल परियोजना की लेटलतीफी के चलते गांवों की प्यास बड़ी होती जा रही है। दावों के बीच जमीनी हकीकत अभी प्यास बुझाती नजर आ रही है। गांवों में कई जगह बंद पड़े काम के चलते एक कंपनी ने काम करने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि विभागीय दावे काम की रफ्तार बढऩे की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत में काम रफ्तार पकड़ता नजर नहीं आ रहा है। इसी का नतीजा है कि यह परियोजना लेटलतीफी की भेंट चढ़ी हुई है। परियोजना के काम से जुड़ी सूर्यदीप कंपनी के काम नहीं करने पर उसकी जगह जीए कंपनी से काम कराने की बात सामने आई। इसके लिए जीए कंपनी की ओर से मैटेरियल का रिकंसलेशन किया जाना था, लेकिन ठेकेदारों के बकाया चल रहे भुगतान के चलते ठेकेदार ने कंपनी को यह काम नहीं करने दिया। इसके बाद कंपनी को यह बात समझ आ गई कि ठेकेदारों करीब डेढ़ करोड़ का भुगतान बकाया है। उसे पहले यह राशि देनी होगी। साथ ही कंपनी ने गांवों में रुके पड़े कार्यों का आंकलन किया तो भी स्थिति ठीक नजर नहीं आई। ऐसे में कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। हालांकि सूर्यदीप कंपनी अभी भी काम करने की इच्छुक है, लेकिन प्रतिभा की ओर से उसे काम नहीं करने दिया जा...

वेंटीलेटर प्रकरण में जिन पर दोष, सरकार ने उन्हें ही सौंपा जांच का जिम्मा

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भरतपुर. सरकारी वेंटीलेटरों को खैरात में निजी हॉस्पिटल को देने के मामले में सरकार भी सच पर पर्दा डालने सरीखा काम कर रही है। अपनों की सलामती और खास पर मेहरबानी के लिए जिन साहब ने तमाम कायदों को किनारे कर दिया। अब जांच का जिम्मा भी उन्हीं ने पूरा किया है। सरकार ने मामले की जांच जिला कलक्टर से कराने की कही है, जबकि वह इस मामले में खुद कठघरे में हैं। आरबीएम अस्पताल से सरकारी वेंटीलेटरों को शहर के जिंदल हॉस्पिटल को देने के मामले में अधिवक्ता विजय कुमार गोयल की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश की गई जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। राजस्थान सरकार के महाधिवक्ता एमएस सिंघवी की ओर से शपथ पत्र पेश करने का कथन कर अवगत कराया कि सरकार की ओर से एक जांच कमेटी नियुक्त की गई थी। इसके बाद जिंदल अस्पताल की ओर से ज्यादा वसूल की गई राशि जमा कराई है। इसके विपरीत विजय कुमार गोयल के अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल एवं हिना गर्ग की ओर से कोर्ट के समक्ष कहा कि जिंदल हॉस्पिटल की ओर से राज्य सरकार के आदेश की अवहेलना में मरीजों से अत्यधिक राशि वसूल कि जा रही थी। जिनको खुद को ही पार्टी बनाया गया है, उनसे जांच ...

सेवा में हुईं संक्रमित, अब हौसलों से जीती जंग

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भरतपुर . यह वक्त मुश्किल जरूर है, लेकिन जल्द ही बीत जाएगा। यदि संक्रमित हो भी जाएं, तो बिल्कुल नहीं घबराएं। नियमित दवाओं के सेवन एवं सकारात्मक सोच से कोरोना के मरीज पूरी तरह ठीक हो रहे हैं। इस बीमारी से जंग जीतने को संयम और हौसला बहुत जरूरी हैं। यह कहना है कोरोना को मात देने वालीं सैटेलाइट अस्पताल में तैनात वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मीनल माथुर का। डॉ. माथुर मरीजों का उपचार करते समय 14 मई को पॉजिटिव आ गईं। इसके बाद उन्होंने खुद को होम आइसालेट किया और चिकित्सकीय गाइडलाइन की पूर्ण पालना करते हुए नियमित दवाओं के सेवन के साथ पौष्टिक भोजन लिया। इस बीच संयम के साथ सकारात्मक सोच बनाए रखी। इसी के बलबूते उनकी रिपोर्ट 20 मई अब नेगेटिव आई है। डॉ. माथुर कहती हैं कि जिला प्रशासन एवं चिकित्सा विभाग पूरी मुस्तैदी से लोगों की जिंदगी महफूज करने को दिन-रात जुटे हैं। इन प्रयासों से निश्चित रूप से कोरोना का खात्मा होगा, लेकिन लोग संक्रमित होने के बाद खुद का मनोबल नहीं गिरने नहीं दें और बेहतर खान-पान और अच्छी सोच के साथ कोरोना से लड़े तो निश्चित रूप से वह इस रोग से उबर सकेंगे। पति ने देखभाल के बीच निभाई ड्यूट...

रसूख की महिमा: पहले खुशामद कर लिया ठेका, अब कामचोरी पर भी नहीं हो रही ब्लेक लिस्टेड

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भरतपुर. चम्बल के पानी के बीच घुसी सियासत का तोड़ किसी के पास नजर नहीं आ रहा। रसूख की बरस रही मेहरबानी के बीच काम नहीं करने वाली कंपनियों का बाल तक बांका नहीं हो रहा है। अफसर खानापूर्ति को पैनल्टी तो लगा देते हैं, लेकिन मेहरबानी के चलते यह फिर से कंपनियों के खाते में आ जाता है। आलम यह है कि कंपनियों की करतूत बैठकों तक ही गूंज कर रह जाती हैं। धरातल पर अफसर भी इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई करने से कतराते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि प्यासे कंठों को और हलकान करने वाली कंपनियां अब तक ब्लेक लिस्ट नहीं हो सकी हैं। यह सब 'सियासी कृपा के चलते ही हुआ है। अधिकारी चाहे लाख दावे करें, लेकिन दावों के पीछे हकीकत किसी से छिपी नहीं है। भरतपुर, कुम्हेर एवं रूपवास ब्लॉक के गांवों का कार्य लंबे समय से बंद है। खास बात यह है कि यह काम प्रतिभा लिमिटेड कर रही थी, जिसे पीएचईडी ने ठेका दिया था। पहले कंपनी ने ठेकेदारों से काम कराया। भुगतान रुकने पर ठेकेदारों ने काम छोड़ दिया। इसके बाद कंपनी ने दूसरी फर्म केसीसी से कार्य कराया। वह भी कार्य पूरा नहीं कर सकी। देरी के कारण प्रतिभा ने सूर्यदीप को खुद ही हटा दिया।...

पहले एक साल में 10 हजार निकले, इस बार आधी मई में इतने संक्रमित

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भरतपुर. कोरोना इस बार कहर बरपा रहा है। पिछले वर्ष 2020 में जितने केस पूरे एक साल में मिले थे। वह इस बार आधी मई तक ही मिल गए हैं। पिछले साल के 10 हजार का आंकड़ा इस बार मई माह तक ही पूरा हो गया। पिछले वर्ष पहले तीन माह में एक भी केस सामने नहीं आया, जबकि इस वर्ष साल की शुरुआत से ही केस मिलना शुरू हो गया। मौतों के आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल की तुलना में इस बार कई गुना अधिक मौत हुई हैं। वर्ष 2020 की बात करें तो अप्रेल माह से पॉजिटिव मिलना शुरू हुए, जो जून में बढ़कर अक्टूबर नवम्बर माह में पीक पर आए, लेकिन इस बार कोरोना का पीक मई माह ही आ गया है। पिछले वर्ष नवम्बर माह में सर्वाधिक 2284 पॉजिटिव सामने आए थे, जबकि इस बार यह रिकॉर्ड अप्रेल माह ही में टूट गया। इस वर्ष अप्रेल माह में 2395 केस मिले। वहीं मई माह में अब तक सर्वाधिक 7512 पॉजिटिव सामने आ चुके हैं, जबकि अभी माह में कई दिन और बकाया हैं। आलम यह है कि पिछले बार सामान्य केस मिलने पर भी पूरी सतर्कता थी, लेकिन इस बार होम आइसोलेट व्यक्तियों पर प्रशासन की नजर कम ही जा रही है। ऐसे में इस बार गांवों में पॉजिटिवों की संख्या में इजाफा होता ...